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शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाते हैं? पौराणिक कथाएं

जानिए शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है और इससे जुड़ी रोचक पौराणिक कथाएं जो आपके जीवन को बदल सकती हैं

Published July 2, 2026
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4 Min Read

शनिदेव, न्याय के देवता और कर्मफल के दाता, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और कर्मों का फल मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे कई रोचक पौराणिक कथाएं और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए, जानते हैं शनिदेव और तेल के इस अद्भुत संबंध के बारे में।

Contents
शनिदेव का परिचयशनिदेव को तेल चढ़ाने की पौराणिक कथाकथा 1: शनिदेव और भगवान कृष्णकथा 2: शनिदेव और राजा विक्रमादित्यकथा 3: शनिदेव और माता पार्वतीतेल चढ़ाने के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण1. ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करना2. शनि की गर्मी को शांत करना3. कर्मों के बंधन से मुक्तिकैसे चढ़ाएं शनिदेव को तेल?विधि:

शनिदेव का परिचय

शनिदेव को सूर्यदेव और छाया का पुत्र माना जाता है। उनका स्वरूप काला और भयावह है, जो न्याय और अनुशासन का प्रतीक है। वे अपनी दृष्टि से अच्छे-बुरे कर्मों का फल देते हैं, इसलिए उन्हें “कर्मफल दाता” भी कहा जाता है।

  • वाहन: कौआ या गिद्ध
  • अस्त्र: त्रिशूल, गदा और तलवार
  • प्रिय वस्तु: तेल, काला तिल, उड़द की दाल, लोहा

शनिदेव को तेल चढ़ाने की पौराणिक कथा

कथा 1: शनिदेव और भगवान कृष्ण

एक बार शनिदेव ने भगवान कृष्ण को अपनी कुदृष्टि से देखा। कृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग हो गया। जब कृष्ण ने शनिदेव से इसका कारण पूछा, तो शनिदेव ने कहा – “यह मेरी दृष्टि का प्रभाव है।” तब कृष्ण ने शनिदेव को तेल से स्नान करवाया और उनकी पूजा की। इससे शनि प्रसन्न हुए और साम्ब का रोग दूर हो गया। तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

कथा 2: शनिदेव और राजा विक्रमादित्य

राजा विक्रमादित्य के समय में शनिदेव ने उनकी परीक्षा ली। शनि ने राजा को सपने में दर्शन दिए और कहा – “मुझे तेल से स्नान कराओ, नहीं तो मैं तुम्हारे राज्य को नष्ट कर दूंगा।” राजा ने शनिदेव को तेल चढ़ाया और उनकी कृपा से अपने राज्य को बचाया।

कथा 3: शनिदेव और माता पार्वती

एक बार माता पार्वती ने शनिदेव से पूछा – “हे देव, आपको तेल क्यों प्रिय है?” शनिदेव ने उत्तर दिया – “मेरे पिता सूर्यदेव तेजस्वी हैं, लेकिन मेरा शरीर काला है। तेल मेरी गर्मी को शांत करता है और मुझे शीतलता प्रदान करता है।”

तेल चढ़ाने के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

1. ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करना

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक कठोर ग्रह है जो कुंडली में पीड़ा दे सकता है। तेल चढ़ाने से शनि की क्रूरता कम होती है और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

2. शनि की गर्मी को शांत करना

शनिदेव सूर्यपुत्र हैं और उनमें अग्नि तत्व विद्यमान है। तेल उनकी गर्मी को शांत करके उन्हें प्रसन्न करता है।

3. कर्मों के बंधन से मुक्ति

तेल चढ़ाने का अर्थ है – “हे शनिदेव, मेरे कर्मों के बंधन आपके चरणों में समर्पित हैं।” यह आत्मशुद्धि का प्रतीक है।

कैसे चढ़ाएं शनिदेव को तेल?

  • दिन: शनिवार
  • समय: सुबह या शाम
  • तेल: सरसों का तेल या तिल का तेल
  • मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः”

विधि:

  1. शनि मंदिर जाकर शनिदेव की मूर्ति पर तेल अर्पित करें।
  2. तेल से शनि यंत्र या शनि की प्रतिमा को स्नान कराएं।
  3. काले तिल, उड़द की दाल और गुड़ का दान करें।
  4. शनि स्तोत्र का पाठ करें।

शनिदेव को तेल चढ़ाना केवल एक रीति नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह हमें यह सीख देता है कि कर्मों का फल अवश्य मिलता है और शनिदेव की कृपा पाने के लिए सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। अगर आप भी शनि की कुदृष्टि से बचना चाहते हैं, तो नियमित रूप से शनिवार को तेल अर्पित करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

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