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Rangbhari Ekadashi 2025 आमलकी एकादशी पूजाविधि महत्व आंवला पूजन

Published June 26, 2026
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3 Min Read

आमलकी एकादशी का परिचय

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। 2025 में यह पर्व [तिथि डालें] को मनाया जाएगा।

Contents
आमलकी एकादशी का परिचयआमलकी एकादशी का धार्मिक महत्वपौराणिक कथाआमलकी एकादशी की पूजा विधिसुबह की तैयारीआंवले के वृक्ष की पूजाभगवान विष्णु की आराधनाआंवला पूजन का रहस्यधार्मिक दृष्टि सेवैज्ञानिक दृष्टि सेविशेष सुझाव

आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा

ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार चित्ररथ नामक राजा ने आमलकी एकादशी का व्रत किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और अंत में मोक्ष प्रदान किया।

आमलकी एकादशी की पूजा विधि

सुबह की तैयारी

  • प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

आंवले के वृक्ष की पूजा

  • आंवले के वृक्ष के नीचे सफेद कपड़ा बिछाएं।
  • वृक्ष की जड़ में दूध, जल, फूल और अक्षत अर्पित करें।
  • ऊपर दीपक जलाकर इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

भगवान विष्णु की आराधना

  • तुलसी दल, फल और मेवे से भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • इस मंत्र का 108 बार जाप करें:

    “ॐ नमो नारायणाय”

  • शाम को आरती करके भोग लगाएं।

आंवला पूजन का रहस्य

आयुर्वेद और धर्मशास्त्र दोनों में आंवले को अमृत तुल्य माना गया है।

धार्मिक दृष्टि से

  • मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु निवास करते हैं।
  • इस दिन आंवले के नीचे बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से

  • आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • इस दिन आंवले का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।

विशेष सुझाव

  • इस दिन गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।
  • पूरे दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
  • रात्रि जागरण करके भजन-कीर्तन करें।

आमलकी एकादशी का पर्व हमें प्रकृति और ईश्वर के बीच के गहरे संबंध का बोध कराता है। यह दिन भक्ति और सेहत दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस पावन एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा अवश्य करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

“एकादशी के व्रत से मिलता है मोक्ष का मार्ग,
आमलकी पूजन से होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण।”

(नोट: पूजा विधि में दिए गए मंत्रों की शुद्धता के लिए किसी ज्ञानी व्यक्ति या पंडित से सलाह अवश्य लें।)

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